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राधा प्रेम (राधा अष्टमी)

Indira Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झूम झूम सावन बरसने लगा
        
                                                    
                            
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा ।

था राधा को कृष्ण संग जन्मों का प्यार
आज करके वह आई सोलह सृंगार
मन चंचल हो यूँ अब मचलने लगा
दिल वंशी की धुन संग धड़कने लगा ।

झूम झूम सावन बरसने लगा
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा।

थी राधा, वंशी की धुन की गुलाम
सुबह शाम लेती वह कृष्ण का नाम
नाम राधा संग कृष्ण का जुड़ने लगा
प्रीत बंधन से दो दिल बंधने लगा ।

झूम झूम सावन बरसने लगा
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा।

राधा-लहराई हरी अब चूनर
प्रेमदृष्टि पड़ी कृष्ण की उसपर
स्नेहझूला में झूल नयन मिलने लगा
सुगन्धित पवन मंद बहने लगा ।

झूम झूम सावन बरसने लगा
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा।

था नशा नेह दिल का प्रेम उमंग
हुई राधा कृष्ण संग ऐसी मगन
देख बादल गगन में छाने लगा
घटा संग बदरा बरसने लगा ।

झूम झूम सावन बरसने लगा
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा।

आज जीत लिया राधा ने कृष्ण का मन
कर जोड़ इंदिरा करती नमन
नगाड़े संग ढोल अब बजने लगा
राधे-राधे बोल दिन ढलने लगा ।

झूम झूम सावन बरसने लगा
कि राधा का कृष्ण प्रेम उमरने लगा।
6 घंटे पहले
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