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मंथन

Harshita Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काँधे पर डाले बोझ चला ,
        
                                                    
                            
मैन जाने किस ओर चला।
सब पा लेने की होड़ में,
कुछ छू लेने की दौड़ में,
मुट्ठी में जकड़ी रेत सी,
हौले से रिसती ज़िन्दगी।
4 वर्ष पहले
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