आज मन में एक बात आई.....
सोचा! चलो आज कुछ बात करें!
पर ,किस बारे में बात करें?
सोचा!क्यूँ न बातों की ही बात करें?
तो फिर इंतज़ार किस बात की..
आओ मिलकर शुरुआत करें...
बातों से ही व्यक्तित्व हैं, बातों से ही वक्तव्य है,
बातों से ही मनुष्यता की प्रखर पहचान।
जिनमे वो बात नहीं, वो प्राणी है अज्ञान।।
बातों में भी क्या गज़ब बात है!
कह दे अगर कोई दो बात सुँदर,
तो कहते हैं,"वाह!क्या बात है!"
वहीं, लग जाये कोई बात दिल अंदर,
तो कहते नहीं थकते "भला, ये भी कोई बात है?"
बातों की दुनियाँ में कई सारी बातें हैं..
कुछ अच्छी तो कुछ गलत बातें,
पर गलत बातों की जानकारी लेने में
कुछ गलत बात नहीं है।
पर गलत बातों की जानकारी लेकर,
उनका ग़लत इस्तेमाल करना,
ग़लत बात है।
बातों में ही, लोगों को, बाँधने की,
शक्ति होती है।
बातों में ही,एक शब्द-शिल्पिकार की,
कला निहित होती है।
बातों में, मनोबल को बल देने की,
प्रेरक क्षमता होती है।
और बातों में ही, भर्त्सना कर जमींदोज,
करने की मारक क्षमता होती है।
बातों में ही वागीश्वरी का वास है।
बातों की मिठास से ही,
रिश्तों का एहसास है।
सत्संगति की बातों से ही,
सिद्ध आध्यात्म संज्ञान।
बोध हो ईश्वरीय सत्ता की,
कहते वेद-पुराण।।
बातों की भी क्या बेमिसाल बात है।
बातों की भी क्या बाकमाल बात है।
प्रधानमंत्री की वो एक बात ही थी,
जिनकी, महज एक बात ने,
सकल राष्ट्र को एकजुट किया।
"जनता कर्फ़्यू" के समर्थन में,
"कोरोना" के विरुद्ध "शंखनाद" किया।
अखिल विश्व जिसे,हतप्रभ नज़रो से,
दीदार करता रहा।
विश्व के दूसरे बड़े विशाल जनसमूह की,
एकता को निहारता रहा।
सम्पूर्ण विश्व की महाशक्तियों ने,
भारत का लोहा माना,और
ये कहने पर मजबूर किया, कि...
"भई मोदी में कुछ तो बात है।।"
बातों ही बातों में वक्त का पता न चला।
मेरी कलम लिखती रही, और काव्य रूप,
बनता चला..
अब, वक्त हो चलाअपनी बातों को विराम,
देने की..
अगर हुई हो कोई त्रुटि,तो कृपा करें क्षमादान,
देने की..
कहने को तो, अब भी कई सारी बातें हैं उलझी,
मन के भवंर-जाल में।
पर अब आगे की बात, अगली मुलाकात में.....
- गुरु शिवम
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें