विज्ञापन

मेरी माँ का आँचल है हिन्दी

Girish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            

मेरे देश में मेरी हिन्दी का अस्तित्व अलग कुछ ऐसा है


मिट्टी लिपटे बच्चों के सिर एक माँ के आँचल जैसा है

भू-मंडल पे इससे सुन्दर समृद्ध नहीं कोई भाषा है
इस धरा के कोने-कोने में गूंजे हिन्दी अभिलाषा है

मीठी बोली, सोंधी सुगंध, पनघट की शीतल छाया है
यह सिंह देश की माटी है और शेरों को जन्माया है

सब भाव, भंगिमा, संप्रेषण, चाहे प्रकृति के सुर घोलो
इसमे अभिव्यक्ति बड़ी सरल जैसा चाहो वैसा बोलो

लिखते हैं बिल्कुल ठीक वही, जैसी यह बोली जाती है
'ब्रह्मांड-ध्वनि' और 'सृष्टि-नाद' इसमे हूंकारी जाती है

यह वीर भूमि की भाषा है वीरों के लहू मे दौड़ती है
प्रशस्ति वीर की गाती है नस में अंगारे भरती है

यह 'तुलसीदास' की भक्ति है 'केशव' कवि का शृंगार भी है
यह 'पंत जी' का प्रकृति-प्रेम 'सुभद्रा' की ललकार भी है

'भारतेन्दु' की है रीति काल 'भगवतीचरण' का छायावाद
यह 'दिनकर' जी का देश-प्रेम है 'मुक्तिबोध' की मुक्त आवाज

जयशंकर की 'कामायनी' है, है 'कालीदास' का 'मेध-दूत'
है 'यशोधरा' की व्यथा-कथा, 'साकेत' मैथिलीशरण गुप्त

बच्चन जी की 'मधुशाला' में, यह 'निशा-निमंत्रण' देती है
मधुप्याले मे 'मधुबाला' बन, मादक मंदिरा भर देती है

दो टूक कलेजे का करता वह 'महाप्राण' का 'भिक्षुक' है
'पथ के साथी' 'महादेवी' का 'गिल्लू' बड़ा ही नटखट है

यह हिन्दी हर बुंदेलों के मुंह रानी की गाथा गाती है
कभी 'सूर्यकांत' की रचना में रास्ते का पत्थर तोड़ती है

'अज्ञेय' को हरदम ज्ञेय रही 'शिवमंगल' की छाया बनकर
'नागार्जुन' के संग प्रगतिशील चली 'प्रेमचंद' के गांव-डगर

सुर-ताल लय और छन्दो में यह ठुमक-ठुमक के चलती है
सब राग-रागिनी रंग-रूप यह गद्य और पद्य मे पलती है

माथे की बिंदी मधुर काव्य रस अलंकार इसका श्रृंगार
इतनी मन मोहक वाणी है जो डुबता है नहीं होता पार

यह गर्व मेरी मातृभूमि की है मन पुलकित होता बारंबार
हर रोज ही है हिन्दी का दिन हर रोज मने इसका त्योहार

- गिरीश 


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Vijay BindaasRaja

192 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10438 कविताएं

View Profile