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क्यों इतनी उम्मीदें हैं तुझे ए-जिंदगी

Ektarajesh Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्यों इतनी उम्मीदें हैं तुझे ए-जिंदगी
        
                                                    
                            
गम को बर्दाश्त करना सीख जा
जहां मुकम्मल ना हो सके तेरे सपने
वहां बिना सहारे के जीना सीख जा ।
5 घंटे पहले
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