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गुनाहगार हो गए.....

Dr. Raghav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न जाने कौन सी शिकायत के,
        
                                                    
                            
हम शिकार हो गए,
जितना दिल साफ़ रखा,
उतना गुनाहगार हो गए।
हमने जितनी मासूमियत दिखाई,
ये दुनिया के लोग उतने खूँखार हों गए।
झूठ बोला तो इज्ज़त बची रही,
जब सच कहा तो खुद शर्मशार हो गए।
न जाने कौन सी शिकायत के,
हम शिकार हो गए,
जितना दिल साफ़ रखा,
उतना गुनाहगार हो गए।

जितने हमने कपड़े भी न बदले,
उतने लोगों के किरदार हो गए।
अपनो के जख़्म इतने लगे कि,
हम ज़ार ज़ार हो गए।
न जाने कौन सी शिकायत के,
हम शिकार हो गए,
जितना दिल साफ रखा,
उतने गुनहगार हो गए।

हर लम्हा जीने की कोशिश की,
हर लम्हा खुश रहने की कोशिश की।
मगर गम के खत कई हज़ार हो गए,
न जाने कौन-सी शिकायत के,
हम शिकार हो गए,
जितना दिल साफ़ रखा,
उतने गुनाहगार हो गए।।

- डॉ. राघव चौहान
मुरादाबाद, उत्तर-प्रदेश
3 वर्ष पहले
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