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खेलने वाले तो खेल खेल ही जाते हैं

Dr-Devesh Khare

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                            खेलने वाले तो खेल, खेल ही जाते हैं
        
                                                    
                            
मन तक लेकिन बहुत कम ही पहुंँच पाते हैं।

शौक रखते हैं कुछ लोग दिल को लगाने का
शौक पूरा करके, कितनों को तड़पाते हैं।

खुशबू फैली है जब भी चमन में कलियों की
झुंड भौंरों के पास उनके मंडराते हैं।

उन्हें न फूल से मतलब है न ही कलियों से
चपलता पराग चुराने की वो दिखाते हैं।

उन्हें इतना पास कभी मत आने दो 'देव'
जो अपने किये वादों को फिर झुठलाते हैं।

डॉ० देवेश कुमार खरे,
लखनऊ 

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