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पर हमसफ़र तुम ना होगे

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंजिलें होंगी कारवाँ होगा
        
                                                    
                            
पर हमसफ़र तुम ना होगे .

दरख्तों की गवाही भी होगी
कदमों के संग तुम ना होगे.

पगों में चुभेंगे कांटे हमारे
लहू तो बहेगा तुम ना होगे.

फ़ूलों की गंध अकेले मिलेगी
क्या मायने जब तुम ना होगे.

बहुत खूबसूरत दुनिया दिखेगी
नहीं चाहिए कुछ तुम ना होगे.
-दिनेश चौहान
4 घंटे पहले
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