मंजिलें होंगी कारवाँ होगा
पर हमसफ़र तुम ना होगे .
दरख्तों की गवाही भी होगी
कदमों के संग तुम ना होगे.
पगों में चुभेंगे कांटे हमारे
लहू तो बहेगा तुम ना होगे.
फ़ूलों की गंध अकेले मिलेगी
क्या मायने जब तुम ना होगे.
बहुत खूबसूरत दुनिया दिखेगी
नहीं चाहिए कुछ तुम ना होगे.
-दिनेश चौहान