कौन हो तुम?
इस बेरंग सी दुनिया में मेरे,
एक रंगीन सा सपना हो तुम|
तप्ती धूप में वो,
आशा की बरसात हो तुम|
सूरज की किरणों का
वो निखार हो तुम,
और सितार के तारों की धुन का
वह झंकार हो तुम|
पक्षियों का सुरीला सुर हो तुम,
भंवरों को आकर्षित कर लो,
वैसा फूल हो तुम,
और पहाड़ों को देखते रह जाने वाला
वैसा अत्यंत सुंदर दृश्य हो तुम|
सवाल है कि कौन हो तुम?
तो जवाब एक सब कुछ हो तुम,सब कुछ हो तुम,
सब कुछ हो तुम……