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वहाँ से नई राह निकल रही है।

Devendra Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब बेला बदल रही है,
        
                                                    
                            
कली-कली संवर रही है

अंधेरा सिमटने को है आतुर ,
पूरब की लाली निखर रही है।

जो ख़ामोशी थी राहों पर,
वही सरगोशी में बदल रही है।

स्वप्न पुराने पीछे छूटे
नई उम्मीदें पनप रही है।

ठिठक गए थे कदम जहां ,
वहाँ से नई राह निकल रही है।

अब बेला बदल रही है,
नई किरणें फूट रही है
7 घंटे पहले
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Dn Chaubey

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