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नारी शक्ति

Devender Grover

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सृष्टि नहीं नारी बिना, नारी जगत आधार,
        
                                                    
                            
नारी के हर रूप की, महिमा बहुत अपार!
कठिन परिस्थितियों में सदा, लेती खुद को ढाल,
नारी एक बहती नदी, जीवन करे निहाल!!
नारी मूरत है त्याग की, प्रेम दया की खान,
करना जीवन में सदा, नारी का सम्मान!
नारी को अबला समझ, मत कर भारी भूल,
नारी इस संसार में, जीवन का है स्वरूप!!
जिस घर में होता नहीं, नारी का सम्मान,
देवी पूजन व्यर्थ है, व्यर्थ वहाँ सब दान!
तुम ही माँ हो, तुम ही बेटी, तुम दुर्गा का रूप,
तुम चंडी विकराला हो, नारी तुम ज्वाला स्वरूप!!
खुशियों को रखती सँजो, जैंसे मोती को सीप,
नारी तुम बंदनवार हो, तुम संध्या दीप स्वरूप!
तार-तार होती रही, फिर भी बनी सितार,
नारी ने हर पीर सह, बाँटा केवल प्यार!!
सूना है नारी बिना, सारा यह संसार,
वह मकान को घर करे, देकर अपना प्यार!
पहनावा ही था ग़लत, किया सभी ने सिद्ध,
चिड़िया रोती रह गई, बरी हो गये गिद्ध!!
घर कोई उजड़े नहीं, बदलें अगर विचार,
बहुओं को भी मिल सके, बेटी जैसा प्यार!
बनें आर्थिक रूप से, नारी सभी सशक्त,
बदलेगा यह देश तब, यही कह रहा वक्त!!
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
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