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पंच शक्ति, चार दिशा, एक भारत

Devaki Nandan

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                            पंच शक्तियों से बंधा ये हिन्दुस्तान,
        
                                                    
                            
चारों दिशाओं में गूंजे एक ही गान।

पूर्व में जल है, गंगा की पावन धार,
सूरज उगता, देता जीवन का उपहार।

पश्चिम में अग्नि है, रेगिस्तान की आंच,
जवानों का शौर्य, सीमा की मजबूत बांह।

उत्तर* में आकाश है, हिमालय का मान,
बर्फीली चोटियाँ करतीं तिरंगे का गुणगान।

दक्षिण में भूमि, उपजाऊ और महान,
कावेरी-कृष्णा से सींचा ये हिन्दुस्तान।

मध्य में वायु है, दिल दिल्ली का प्राण,
सबको जोड़ती, देती एकता का प्रमाण।

पाँच तत्व, चार कोने, और बीच में एक दिल,
तभी तो गर्व से कहता है हर हिन्दुस्तानी,
 
2 महीने पहले
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