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तेरा जलवा

dev sachdeva

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमने जब से तेरा जलवा देखा,
        
                                                    
                            
फिर न कुछ भी तेरे सिवा देखा।

तू जहां है वहीं मंज़िल है मेरी,
नक्श-ए-कदम तेरा जादा देखा।

जबसे तुम बस गए निगाहों में ,
हरेक शय में तेरा चेहरा देखा।

तेरे ख़यालों में और ख़्वाबों में,
बारहा ख़ुद को ही ग़र्क़ा देखा।

बेकरार दिल को आता है क़रार,
वस्ल-ओ-तरब तेरा मुदावा देखा।

तुझसे नज़रें मिलाकर हमने तो,
ख़ुद को चढ़ता हुआ नशा देखा।

फूलों के रंग-ओ-बू में तू ही है,
हर जगह तेरा नज़ारा देखा।

तुझको तो दिल में बसा रक्खा है,
चाहा जब भी तेरा चेहरा देखा।

"शमीम" तू ही तो ज़िन्दगी है मेरी
मैंने तुझ में वजूद अपना देखा।
-देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
6 घंटे पहले
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