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नौकरी वाला सपना

Dev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नौकरी वाला सपना
        
                                                    
                            

एक कागज़ की डिग्री हाथ में लिए,
बाप की उम्मीदें साथ में लिए,
घूम रहा है वो दर-दर गली-गली,
फाइलों में अपना भविष्य लिए।

सुबह अखबार में नौकरी ढूंढता है,
शाम को पोर्टल पर फॉर्म भरता है,
उम्र निकल रही है कतारों में,
और सिस्टम बस तारीख देता है।

कहते हैं स्किल नहीं है तुममें,
पर बरसों पढ़ाया किसने था?
मेले लगते हैं रोज़गार के नाम पर,
पर रोज़गार मिलता कितनों को था?

ना वो निठल्ला है, ना कामचोर है,
बस एक मौका चाहता है,
अपने पसीने से वो भी,
अपना घर चलाना चाहता है।

कुर्सी वालों सुनो, ये भीड़ नहीं है,
ये देश का कल है जो खड़ा है,
डिग्री को नहीं, हुनर को पूछो,
और हुनर को मौका दो जरा।
5 घंटे पहले
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