विज्ञापन

दिल ढूंढता है फिर वही

Chitra Bisht

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल ढूंढता है फिर वही
        
                                                    
                            
रख कर भूले सामान कई
सम्हाले जो जतन से बड़े
जाने क्यों मिलते नहीं

सर पर टिका हुआ ऐनक
खोजते रहे कब तलक
तौलिया जो नहाते वक्त
हो जाता गायब तुरन्त

दिल ढूंढता है फिर वही

बोतल हाज़िर तो ढक्कन नदारद
सीटी गायब और कुकर सलामत
फोन की बैटरी जब हो कमतर
जाने क्यों चार्जर मिलता नहीं

दिल ढूंढता है फिर वही

चाय की पत्ती हो या अगरबत्ती
काँटा छुरी हो या फिर मोमबत्ती
मेज की परिक्रमा में दिन निकला
पर दिखता नहीं सामान रखा वहीं

दिल ढूंढता है फिर वही

 
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

1 कविता

View Profile

HIMANSHU CHARAN

3 कविताएं

View Profile

ABHISHEK KUMAR

12 कविताएं

View Profile