दिल ढूंढता है फिर वही
रख कर भूले सामान कई
सम्हाले जो जतन से बड़े
जाने क्यों मिलते नहीं
सर पर टिका हुआ ऐनक
खोजते रहे कब तलक
तौलिया जो नहाते वक्त
हो जाता गायब तुरन्त
दिल ढूंढता है फिर वही
बोतल हाज़िर तो ढक्कन नदारद
सीटी गायब और कुकर सलामत
फोन की बैटरी जब हो कमतर
जाने क्यों चार्जर मिलता नहीं
दिल ढूंढता है फिर वही
चाय की पत्ती हो या अगरबत्ती
काँटा छुरी हो या फिर मोमबत्ती
मेज की परिक्रमा में दिन निकला
पर दिखता नहीं सामान रखा वहीं
दिल ढूंढता है फिर वही