उत्तर पूर्व के चेहरों को जो "चीनी" बता कर टालते हैं,
पूर्वोत्तर के अपनों के सीने में गहरे खंजर डालते हैं।
ज़रा सोचो, उस दर्द का अंदाज़ा कैसे लगाओगे,
जब अपने ही देश में कोई तुम्हें पराया कह कर बुलाएगा?
बिहार का नाम सुनते ही, झट से 'गरीब और गवार' कह देते हैं,
मेहनत की इस पावन माटी को पल भर में अपमानित कर देते हैं।
झारखंड की हरी वादियों को जो 'आदिवासी और जंगली' पुकारते हैं,
अपनी ही संस्कृति की जड़ों पर, वे खुद ही कुल्हाड़ी मारते हैं।
दक्षिण के साँवले रंग को देख कर, जो मज़ाक उड़ाया करते हैं,
क्या वे इंसानियत के इस इम्तिहान में खुद को पास समझते हैं?
हर छोटी-बात पर सरकार को कोसना हमारा पुराना दस्तूर है,
सवालों के घेरे में हमेशा देश का हर एक मज़दूर और हुज़ूर है।
सुविधाएं चाहिए बिल्कुल फ़र्स्ट-क्लास और एकदम शानदार,
पर आदतों में हमारी अब भी है थर्ड-क्लास विचार!
सड़क पर कचरा फैलाएंगे, नियमों को रोज़ तोड़ेंगे,
और फिर बड़ी शान से देश की व्यवस्था को छोड़ेंगे।
ऊंचे-ऊंचे दावों और नारों से सजा है हमारा फलक,
यही तो है साहब... हमारा 'इंक्रेडिबल इंडिया', अनोखा मुल्क!
-चीनू मिश्रा