विज्ञापन

सीजफायर के सवाल पर

Chandan Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्रांति का अग्रदूत कौन है,
        
                                                    
                            
शांति का अग्रदूत कौन है?
जो आंसुओं की भाषा समझे,
और शहीदों के दर्द को पढ़े — वो कौन है?

पहलगाम की घाटी फिर काँपी थी,
धरती ने चुपचाप पीड़ा बाँटी थी।
जब निर्दोषों पर गोलियाँ बरसीं,
क्या तब भी शांति की बात सच्ची थी?

कहाँ गई वह रेखा सीज़फायर की,
जब मासूमों की चीखें चीरती हैं रातें?
क्या संवाद तब भी संभव है,
जब लहू से रंगी हों पहाड़ी पगडंडियाँ सातें?

शांति की बात बहुत सहज लगती है,
जब भीतर कोई आग न जलती है।
पर जिन्होंने अपनों को खोया है,
उनके लिए हर क्षण क्रांति पलती है।

हम क्रांति के विरुद्ध नहीं,
हम शांति के विरुद्ध नहीं।
पर शांति तब अर्थपूर्ण है,
जब न्याय की भी कोई ज़ुबान हो कहीं।

जो पहले अपने घर को बचाए,
और फिर पड़ोसी से हाथ बढ़ाए।
जो आतंक के विरुद्ध अडिग हो खड़ा,
वही है सच्चा अग्रदूत — हमारा सच्चा नेता।

सीज़फायर तब तक व्यर्थ है,
जब तक छाया रहे आतंक का डर।
शांति तभी सार्थक होगी,
जब साजिशें न उपजें उस पार हर पहर।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile