पहली बार देखा है
कुदरत का ऐसा नजारा।
है पछतावा दिल को
तू क्यों नहीं हुआ हमारा।।
आखिर देर क्यों कर दी तुमने आने में।
काश ! कही मिल ही जाते अनजाने में।।
होता अगर ऐसा तो कहानी नई बन जाती।
इस अजनबी दुनिया में
चांद से मुखड़े वाली हमारी कहलाती।।
धड़कनें थम सी जाती जब
तुमने सामने कदम रखा होता।
ऐसा लगता जैसे पहली बार
इस दिल ने रब को देखा होता।।
शरमा कर चाँद भी
बादलों के पीछे छुप गया होता।
तुम्हारी एक झलक पाने को
वो भी रुक गया होता।।