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'आप' की दिल्ली

BS Rathore

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर्मी के प्रकोप से, जन मन बेहद त्रस्त
        
                                                    
                            
पानी के प्रबंध में, दिल्ली वासी व्यस्त।

कोश रहे सरकार को, कुछ किया नहीं प्रबंध
हावी टैंकर माफिया, आप मिली है संग।

के वी गदगद हो रहे, रहकर अंदर जेल ,
इसी विना पे शायद, फिर से मिल जाये बेल।

मुफ्त बांट के आलावा, किया नहीं कुछ काम
हर संकट की उपज को, बीजेपी बदनाम।

गिरगिट भी शरमा गई, देख केजरी रंग
खोकर सारी सीट को, तिलिस्म हुआ सब भंग।

एक एक कर जा रहे, सब तिहाड़ की ओर
इस्तीफ़ा न दे रहे , है कुर्सी का मोह।

जल संकट या बाढ़ हो, हरियाणा बदनाम
आपन कुछ न कीजिये, दोष दूसरे नाम।

घुसपैठी सब बस गए, दिल्ली के दरम्यान
वोट बैंक वो बन गए, गदगद 'आप' महान।

दो नंबर ढीली शर्ट, सौ नंबर का झूट
ऊपर से भोली हंसी, शर्म गई सब छूट।

जनता के दरबार में, अब नहीं चले अंधेर
वक्त बहुत सा दे दिया, अब नहीं मिलेगी ठौर।
2 वर्ष पहले
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