डाली से बिछुड़े फूलों की पंखुड़ियाँ,
सोच-सँवारकर रचती हैं यह पुष्प-विन्यास;
इसे केवल ‘पुक्कलम’ कहना क्या उचित है?
‘पुष्पहार’ ही शायद इसका सार्थक नाम हो,
क्योंकि पाताल से लौटने वाले
राजा महाबली के वक्ष पर चढ़ाने को
यही तो है सबसे उपयुक्त उपहार!