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चंद्रमा की सुंदरता

Ashish Trivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अरुणिमा प्रखर स्वर सा ,चंद्र देदीप्यमान है,
        
                                                    
                            
रात्रि नववधू शोभित, दीप संग विद्यमान है,
ज्योति ज्योति पग पग पर, कंठ सजा हार है,
चंद्रमा की सुंदरता पर, रीझता संसार है।

चातक मुख चंद्र दिए, बस जोहता बाट है,
स्वर्णिम सी चंद्र प्रभा, की ही आज ठाट है,
पथ पथ पर सज रहा, अद्भुत सा द्वार है,
चंद्रमा की सुंदरता पर, रीझता संसार है।

अलियों का मस्त झुंड,गुंजन की ताल में,
नृत्य करती चांदनी, नवनीत तिलक भाल में,
अहा ये कैसा प्रकृति रास,हो रहा चमत्कार है,
चंद्रमा की सुंदरता पर, रीझता संसार है।

- आशीष त्रिवेदी ,कानपुर/गुरुग्राम


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6 वर्ष पहले
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