करने चला हूँ जो भी,
कर दिखाऊँगा वो भी,
ये तो सिर्फ एक झांकी है,
मेरी जीत अभी बाकी है।
लहरें होंगी परवर, तुझे जितना होगा लड़कर,
सिकन्दर वही बनते है, जो जाते नहीं पीठ दिखाकर।
मै कर जाऊंगा ये भी, दुआ मेरी माँ की है,
मेरी जीत अभी बाकी है ।
अधीर मन भयभीत मन, सबको करना है समर्पण,
संघर्ष से सफलता तक, कर दूंगा अपना सब कुछ अर्पण।
करने से क्या नहीं होगा, सारा खेल मेरी हाँ की है।
मेरी जीत अभी बाकी है, मेरी जीत अभी बाकी है।
- अरविन्द कृष्णार्जून