विज्ञापन

शुरुआती कवियों की रचनाओं में

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शुरुआती कवियों की रचनाओं में
        
                                                    
                            

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है,
किसी कवयित्री की कल्पनाओं में
ये मन अब बावरा रहता है।

चाँद में उसका चेहरा पढ़ना,
नदी की चंचलता से तुलना करना,
हर पल प्रकृति को निहारकर
रचना करना--
मन में हर पल उसकी यादों का
तूफ़ान-सा छाया रहता है।

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है...।।1।।

मैंने तुमको देखा तो जाना,
अनुभूति क्या होती है...
दूसरों के साथ मुस्काते देखा,
तो जाना ईर्ष्या क्या होती है।

जो शब्द निकल न पाया मुख से,
उसे मैंने किताबों में स्थान दिया।
तुमको दोस्त बनाने की चाह में 
तुम्हें निहारता रहता हूँ,
तुम संग समय बिताने की ख़ातिर
मेरा ये मन मचलता रहता है।

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है...।।2।।

तुमसे मिला तो जाना,
श्रृंगार रस से अनुपम कुछ भी नहीं।
सारे जग को बाँध पाना
किसी और के बस में नहीं।

करुण, वीर, भयानक, अद्भुत और शांत रस--
श्रृंगार रस में ही समाए रहते हैं।
कभी संयोग में, कभी वियोग में,
कवियों का मन मचला करता है।

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है...।।3।।

वियोग श्रृंगार 


जातियों की विभिन्नताओं में—
अब हमारा साथ बदलता दिखता है,
ज़िंदगी में साथ चलने की इस राह में
ये राह और साथ बदलता दिखता है।

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है।।4।।

पहले प्यार हुआ तुमसे, फिर
अब थोड़ी-सी तुमसे ईर्ष्या हुई ।
अब पास नहीं हो तुम मेरे,
इस कारण मेरा दिल जलता है।

शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है।।5।।

तब मैं तुमसे बतियाने को मरता था,
अब मैं तुम्हारे पास ना आना चाहता हूँ।
कहीं राह में मिलूँ अगर तो—
मुस्कुराकर दूर से ही हाथ मिला देना।

जिसे थामना चाहता था ज़िंदगी भर,
उन हाथों को जल्दी हटा देना।
अगर तुम ज़्यादा पास आए मेरे तो
मेरा हृदय भयभीत हो जाएगा।

अब मेरा दिल तुमको अपने जीवन में
मुस्कुराता देखना चाहता है।। 6।।

इसलिए शायद...
शुरुआती कवियों की रचनाओं में
श्रृंगार रस ही समाया रहता है।
-रविकुमार खोब्रागड़े
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile