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रम्ज़ (नज़्म)

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रम्ज़ (नज़्म)
        
                                                    
                            
(रम्ज़: रहस्य/भेद)

अब तू याद नहीं आता मुझे
न तेरी बातें याद आती हैं
न तेरा ज़िक्र अब कहीं होता
न कहीं तेरी बात आती है

तेरा चेहरा अब धुंधला सा गया
मेरे ख्वाबों में, मेरी आंखों में
तेरी महक जो बसी थी कभी
वो महक अब नहीं है साँसों में

न तेरा लम्स है मेरे तन पर
न एहसास कुछ अब बाकी है
जो भी कुछ तुझसे वाबस्ता था
कुछ भी न पास मेरे बाकी है
(लम्स: छूने की क्रिया/स्पर्श)

मैं तेरा हूं, ये भरम भी मर गया कब का
तू मेरा है, ये भरम भी मर गया कब का
बस एक रम्ज़ है, क्यों तुझसे मैं मिला था कभी
बस एक रम्ज़ है, क्यों मुझसे तू मिला था कभी।
(रम्ज़: रहस्य/भेद)

- अनमोल
19 घंटे पहले
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