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ना जाने कैसी कहानी सुना दी किसी ने, मेरी लाश तो आग में दफ़ना दी किसी ने

Anmol

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना जाने कैसी कहानी सुना दी किसी ने,
        
                                                    
                            
मेरी लाश तो आग में दफ़ना दी किसी ने।

वो मुझे देखने आया था जनाज़े के बाद,
वो मगर मेरी निशानी छुपा दी किसी ने।

आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं लगती,
पूरी रात आपके पास बिता दी किसी ने।

घर जला कर अपने अच्छा किया साहब,
आपकी कितनी ख़ुशी बढ़ा दी किसी ने।

मुझे देखकर हर किसी को यही लगता है,
मानो पेड़ से चिड़िया उड़ा दी किसी ने।

खिड़की पर एक कबूतर बैठा करता था,
फिर वो खिड़की भी हटा दी किसी ने।

फुरसात में मिल कर मुझसे बात करना,
तुम्हारी चिट्ठी की मुहर मिटा दी किसी ने।

जो कोई उस पानी में गया है अनमोल,
वहां हर किसी की कश्ती डुबा दी किसी ने।
7 महीने पहले
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Manoj Kumar

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