विज्ञापन

परिचय मेरा

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं गंगा के मैदान से
        
                                                    
                            
मैं हूं हिंदुस्तान से
जीता जिंदगी मैं शान से
करता बातें आसमान से
चौड़ा है सीना
लंबा बदन है
बहाता पसीना
बड़ा मन है
फौलादी हैं बांहें
लक्ष्य पर निगाहें
रख कर बड़े विचार
रख कर शक्ति अपार
करके कर्म हजार
करता मैं स्वदेश से प्यार
स्वदेश हित रहता मैं तैयार
वीरता है मेरा पहचान
चाहता हूं छू लूं आसमान
चाहता हूं करूं नव निर्माण
चला कर कर्म का वाण
रखूं ऊंचा स्वाभिमान
बनाऊं विकसित हिंदुस्तान
मैं बागी बलिया से
मैं बागी बैरिया से
झुकता नहीं शीष कभी
रूकता नहीं आशीष कभी
हैं जहां आम अमरूद के बागान
है जहां के मिट्टी में भगवान
है जहां से भृगु महान
चाहता हूं दूं बड़ा बलिदान
है यही मेरा पहचान
बढ़ता रहे मेरा हिंदुस्तान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

sunil kumar

181 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

594 कविताएं

View Profile

Anita Chaturvedi

161 कविताएं

View Profile