ये नदी,ये नाले,ये पर्वत सारे
इसी में छिपे हैं ईश्वर हमारे
ये खेत खलिहान
ये हमारे रेगिस्तान
इन बच्चों मधुर मुस्कान
ये जवान, ये किसान
इस पावन माटी में
टूटही खाटी में
इन धूल धूसरित बच्चों में
इन प्यारे सच्चों में
हैं मेरे मधुमय गान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'