बलिया आजमगढ से काट कर
बना एक नया सुंदर सा शहर
प्यारा सा शहर
मऊनाथ भंजन
करता मैं उसका बंदन
लगाऊं माथे पर चंदन
१९८८ में गया वहां मैं
खूब पढ़ा वहां मैं
आगे बढ़ा वहां मैं
शहर श्याम नारायण पांडेय का
शहर सुंदर सजा दुल्हन सा
फिर कभी आऊंगा
और शीष झुकाऊंगा
मेरे शहर तुम प्यारे
मेरे शहर तुम दुलारे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'