1857 में जब चम चम चमकी तलवारें
तब सबसे अधिक चमकी बागी बलिया की तलवारें
मंगल पांडे वह वीर थे
जो अंग्रेजों के लिए तीर थे
एक योद्धा ने तीन तीन को मारा
था वह वीर योद्धा हमारा
हमारी मिट्टी से निकले कितने हीरे
चली कितनी तीरें
टूटी कितनी जंजीरें
इसका नहीं कोई हिसाब है
हुए हम आजाद इसका हिसाब है
बनाए पहले सरकार इसका हिसाब है
हमारी वीरता धीरता सब बेहिसाब है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'