रात दिन जो काम करता है
जो नहीं बांधाओं से डरता है
उसको सम्मान कहां मिलता है?
पर पुष्प उसी से खिलता है
ईश्वर के दरबार में पूजा वही जाता है
जो सच्चाई पर बलिदान कर जाता है
इंसान क्या देगा सम्मान?
इंसान क्या करेगा अपमान?
स्वार्थ का पुतला है इंसान
ईश्वर के हाथ का खिलौना है इंसान
पास से देखो कितना घिनौना है इंसान?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'