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हौसले कुछ मगर आजमाने को हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रह गईं थीं जो बातें बताने को है
        
                                                    
                            
जो नहीं कह सके थे सुनाने को है
एक मुद्दत हुई साथ रहते हुए
अब हमारा इरादा भी जाने को है
जिंदगी जी रहे थे तो कहने को हम
मौत से भी तो नजरें मिलाने को हैं
गीत आते थे जितने सभी गा चुके
कुछ नहीं है जो अब गुनगुनाने को है
ऊब गया है परिंदा कफस में मगर
कोई सूरत नहीं उड़ भी जाने को है
वो जो वादे हुए थे मेरे खुद से ही
हो रही देर है सब निभाने को है
अब निकल जाएंगे हम तेरे जाल से
जिंदगी इसमें जो है सताने को है
खो गया,लुट गया है बहुत कुछ मेरा
हौसले कुछ मगर आजमाने को हैं
2 घंटे पहले
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