रह गईं थीं जो बातें बताने को है
जो नहीं कह सके थे सुनाने को है
एक मुद्दत हुई साथ रहते हुए
अब हमारा इरादा भी जाने को है
जिंदगी जी रहे थे तो कहने को हम
मौत से भी तो नजरें मिलाने को हैं
गीत आते थे जितने सभी गा चुके
कुछ नहीं है जो अब गुनगुनाने को है
ऊब गया है परिंदा कफस में मगर
कोई सूरत नहीं उड़ भी जाने को है
वो जो वादे हुए थे मेरे खुद से ही
हो रही देर है सब निभाने को है
अब निकल जाएंगे हम तेरे जाल से
जिंदगी इसमें जो है सताने को है
खो गया,लुट गया है बहुत कुछ मेरा
हौसले कुछ मगर आजमाने को हैं