जब से हकीकतों से पहचान हो गई
हर राह सफर की फिर आसान हो गई
दस्तक दिया उसूलों ने देर से सही
खुशियां हमारे घर की मेहमान हो गई
किसने सीखा दिया है हुनर जीने का हमें
लोगों की साजिशें सभी नाकाम हो गईं
जो खो गया उससे भी ज्यादा ही मिल गया
फरमान पर चले जिंदगी इनाम हो गई
शोहरत अता हुई,हुई सब दौलतें हासिल
नाकामियां रुस्वा हुईं बेकाम हो गईं
रब ने दिया तो कुछ भी कमी न रही अब
दुश्वारियों की सूरतें एहसान हो गई