ख्वाब टूटा था जो सुनहरा था
मजबूरियों का दिल पे पहरा था
एक दूसरे की जरूरत थी उन्हें
इश्क अंधा था हुस्न बहरा था
फट गया लिबास धोते धोते
दाग मोहब्बत का बहुत गहरा था
पिछले रुत था कोई साथ मेरे
मैं बहुत देर वहीं ठहरा था
प्यासा मन, झील सी आंखें तेरी
दूर दूर तक सिर्फ सहरा था