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ख्वाब टूटा था जो सुनहरा था

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख्वाब टूटा था जो सुनहरा था
        
                                                    
                            
मजबूरियों का दिल पे पहरा था
एक दूसरे की जरूरत थी उन्हें
इश्क अंधा था हुस्न बहरा था
फट गया लिबास धोते धोते
दाग मोहब्बत का बहुत गहरा था
पिछले रुत था कोई साथ मेरे
मैं बहुत देर वहीं ठहरा था
प्यासा मन, झील सी आंखें तेरी
दूर दूर तक सिर्फ सहरा था
एक महीने पहले
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