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ऐ आई की सीमा

अनिल कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ए आई की पृष्ठभूमि पर सुंदर रचना रहे सुनाए
        
                                                    
                            
विषय जटिल हैं कीवर्ड टेढ़े खांचे में ढलती है नाय
फिर भी कोशिश कर रहे भइया त्रुटिया हो तो देव भुलाय
आते हैं अब विषय के ऊपर सुनना थोड़ा ध्यान लगाय
इंसानी अस्तित्व को खोजें तीन तत्व तब पड़े दिखाय
बल विवेक बुद्धि ज्ञात रुप में परम तत्व से प्रकटे जाय
अवसर मिला बढ़े ये तीनो फिर वह वह सीमा गई दिखाय
एक सेकंड में 3 लाख की गति से लाइट चलती जाय
उसके चौथाई गति से भी स्पेसशिप कोई चलता नाय
किसी पदार्थ को गर्म या ठंडा मनचाहा न सके बनाय
जिन एडिटिंग की भी सीमा क्रिसपर-कैस न सका मिटाय
उसे क्रॉस करना था मुश्किल दी प्रकृति ने लिमिट लगाय
एक सदी होने को आई लिमिट का ताला टूटे नाय
हार मानने को फ़िर भी यह ह्यूमन विंग्स नहीं दिखलाय
हुई क्रांति फिर बनी मशीनें पावर ही पावर दिखलाए
इंसानी अस्तित्व का उसने एक भाग तब लिया बनाय
फिर आया कंप्यूटर युग जो मानव बुद्धि गया बढ़ाए
सुपर कम्प्यूटर के बनने से बुद्धी की सीमा आ जाय
बल बुद्धि का सही रेश्यो दे न्यूरल नैटवर्क बनाय
फिर भी नहीं बढ़ाये बढ़ता अवचेतन में रहा छुपाय
क्वांटम कंप्यूटर में क्षमता ले विवेक की जगह बनाए
अब वह तीनों कोर एलिमेंट है मानव के पास दिखाय
A I वह चाबी बन रही सके प्रकृति की लिमिट हटाए
जिस दिन लिमिट हटेगी भैया मानव जाति से आगे जाय
अब तक सीमाएं हैं बदली आगे सृष्टि बदल ही जाए
उस बदलाव में कब तक मानव रहे सुरक्षित समय बताय
ए आई गंभीर विषय है अच्छा बुरा साथ दिखलाय
बहुत प्रजाति मिले धरती पर मानव भी उनमें ही आय
ए आई प्रजाति बनी यदि फिर मानव बंदर बन जाय
नियम यही है प्रकृति का मित्रों एक शीर्ष पर रहता भाय
एक घंटा पहले
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