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लगता है कि शायद कहीं पर जाए मेरी बात

Amita Paul

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगता है कि शायद कहीं पर जाए मेरी बात
        
                                                    
                            
तेरे ज़हन में घर कहीं कर जाए मेरी बात

ये सोच के कहती हूँ बहुत एहतियात से
शायद कि तेरे दिल में उतर जाए मेरी बात

होने लगा यक़ीं मुझे इक इंकिलाब हो
आवाम तक इस वक़्त अगर जाए मेरी बात

होगा असर ज़रूर बिना हेर फ़ेर के
जैसे कोई पहुँचाए मगर जाए मेरी बात

मेरा नहीं जहान का होगा ये खसारा
‘अंजुम’ जो मेरे साथ ही मर जाए मेरी बात

 
एक घंटा पहले
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