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चारों धाम, याद रखना!

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माना आज का गाँव वो गाँव नहीं,
        
                                                    
                            
पर हमारे साथ बिताए वो पहले का गाँव याद रखना।
ज़िंदगी के मोड़ पर जब भी धूप मिले,
हमारा दिया वो छाँव याद रखना।
हमारी उंगलियों को पकड़े, हमारी उंगलियों से झूलते,
वो अपने नन्हें-नन्हें लड़खड़ाते पाँव याद रखना।

हमसे ही तुम जाने जाओगे,
हम से ही तुम पहचाने जाओगे,
इसलिए हमारा नाम याद रखना।
हमारा सफर तो अब पल दो पल का है
पर हम जब भी ज़मीं पे आएँ,
हमारे चरणों में है चारों धाम, याद रखना!
एक घंटा पहले
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