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शबाब गुल पर अभी कहाँ है अभी तो खिलना शुरू हुआ है

Ali Asar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सज़ाएं इसको न दीजे हरगिज़ ये दिल बेचारा तो बे ख़ता है
        
                                                    
                            
खताएं सारी नज़र की हैं और नज़र का ही सब किया धरा है

तवाफ़ करने लगे हैं भौंरे अभी से गुलशन का देखिये तो
शबाब गुल पर अभी कहाँ है अभी तो खिलना शुरू हुआ है

न इश्क़ की दास्ताँ सुनाओ न क़ैस ओ लैला का कोई क़िस्सा
अभी तो लेने दो तुल्फ़ मुझको, अभी मोहब्बत की इब्तेदा है

रह ए वफ़ा में तुझे भी जानां मिला है मेरी तरह ही धोखा
क़दम संभल कर तू रख रहा है ये इश्क़ तेरा भी दूसरा है

ऐ जाने वाले तू लौट आ न तुझी से घर की हैं रौनक़ें सब
लरज़ते होटों से दे रहा है 'असर' सदाएं तू सुन रहा है

- अली असर बांदवी
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4 वर्ष पहले
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