चुनना तुम अपने स्वाभिमान को,
चुनना तुम अपने आत्म-सम्मान को,
जीवन तुम्हें जितनी बार चुनाव का मौका दे तुम चुनना।
इन्तजार की जगह तुम सवाल करना चुनना,
बात की जगह तुम बहस चुनना,
चुनना अपनी दिल की भोलेपन को,
चुनना अपने दिमाग ki शांति को,
हर बार चुनन,
जीवन तुम्हें जितनी बार चुनाव का मौका दे तुम चुनना,
फिर वह चुनाव (मतदान) हो, संघर्ष हो या प्रेम।
तुम चुनना।