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पुकार ,मन्नत मल्होत्रा, स्प्रिंगडेल्स पूसा रोड

Abhilash Malhotra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं भूमि धरा धरती
        
                                                    
                            
मैं सबका भार उठाती हूं
मैं सब कुछ सहती जाती हूं
मैं सब कुछ सहती जाती हूं

मेरे पेड़, मेरी हवा, मेरा पानी
नर सब कुछ पाना चाहता है
प्रहार जो होते हैं मुझ पर
वो हृदय बताना चाहता है

मेरे पक्षी मेरे जन्तु
सब एक गुहार लगाते हैं
सब लूट लिया है नर ने
अब संसार से जाना चाहतें है

क्या हो अगर नर सुन ले इनसे
हरियाली मैं चहचहाती बातें
क्या हो अगर नर सीख ले इनसे
अंबर दरिया पहाड़ के बातें
मैं वक्ष चीर दे दूंगी सब कुछ
ये संपति संतनो मैं लुटानी है
ये सीख तुम्हें सिखानी है
ये सीख तुम्हें सिखानी है


माया को पाया मुझे गंवाया
अब बात मैं अपनी सुनती हूं
मैं भूमि धरा धरती
नर तुझको आज बताती हूं
तू मुझसे है मैं तुझसे नहीं
इसे जग संसार बताना है
तू भूल गया तू मुझमें है
बस तुझको याद दिलाना है

मैं साहसी मैं दयावान
मैं धरये धरे सब बैठी हूं
ना कर प्रहार तू सुन पुकार
मैं आस लगायी बैठी हूँ

जाग सवेरा देख तू मेरा
मैं तुझे बुलाने आयी हूँ
तू मेरे आंगन का अंकुर
मैं तुझे जगाने आयी हूँ
मैं तुझे जगाने आयी हूँ

मैं भूमि धरा धरती,
मैं सबका भार उठाती हूं
मैं सब कुछ सहती जाती हूं
मैं सब कुछ सहती जाती हूं...
2 वर्ष पहले
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Milan Thakur

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