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अटल: साहित्य-राजनीति का अनुपम संयोग...

काव्य डेस्क

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अटल जी ने हमेशा जीवन की चुनौतियों का आगे बढ़कर सामना किया। अपने राजनीतिक जीवन में कविताओं से लोगों का मन मोहने वाले अटल जी की कुछ कविताएं तो दिल को छू जाती हैं। हम यहां आपको उनकी लेखनी से परिचित करा रहे हैं।

ज़िक्र राजनीति का हो या कविताओं का अटल बिहारी वाजपेयी जैसे व्यक्तित्व का नाम इन दोनों की सूचिकाओं में अव्व्ल स्थान रखता है। एक राजनीतिज्ञ के लिए जितना व्यवहारिक होना ज़रूरी है, एक कवि होने के लिए उतना ही भावनात्मक होना भी ज़रूरी है लेकिन अटल जी दोनों के ही संयोग से बने एक विशिष्ट व्यक्ति रहे।

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प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार...

अटल जी की राजनीतिक पारी तो जग-जाहिर है, परमाणु परीक्षण जैसे साहसिक फ़ैसले लेने वाले अटल जी की कविताओं में भी उनके इन हौंसलों की महक महसूस की जा सकती है। उनकी कविताएं मन को झंकृत करती हैं, वह लिखते हैं कि


प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार
समर्पण की माँग अस्वीकार
दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

सीकचों मे सिमटा जग...

अटल जी ने अपने जीवन काल के एक-एक क्षण को देश-सेवा और सुधार के लिए समर्पत किया है। आज अगर वह पलटकर अपने अतीत को देखते तो अपने जीवन की सार्थकता को अनुभव करते। यूं भी कवि अक्सर ही बीते समय में किसी भी प्रहर खो जाते हैं, ऐसे में अटल जी ने भी जब अपने भूतकाल पर दृष्टि डाली तो लिखा कि


सीकचों मे सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अम्बर तक
गूंज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन
लौट कभी आएगा
मन का जो मीत गया
एक बरस बीत गया

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं...

इसमें कोई संदेह नहीं है कि वो देश जहां कण-कण में भगवान होने की शिक्षा दी जाती है और देश-प्रेम का पाठ पढ़ाया जाता है, उस देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जो कवि ह्रदय भी हैं वह देश के गौरव को कलमबंद ना करें। पढ़ें अटल जी की देशभक्ति से ओत-प्रोत कविता-

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है
इसका कंकर-कंकर शंकर है
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये

भाजपा को जन जन में बनाया लोकप्रिय...

अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल कृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भाजपा को देश की राजनीति में लोकप्रिय बनाया। भाषण का बेबाक अंदाज और उनकी बेलाग शैली की वजह से लोग उनके मुरीद बने। संसद में अटल की भाषण कला से जवाहर लाल नेहरू भी प्रभावित हुए। उदार छवि की वजह से अटल को विरोधी दलों के नेताओं का भी सहयोग मिला।

8 वर्ष पहले
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