विश्वनाथ प्रसाद 'शैदा' भोजपुरी के बेहद चर्चित गीतकार कवि रहे हैं। आपकी रचना मधुर एवं सरस होती है। आप भोजपुरी मुहावरों का प्रयोग काव्य रचनाओं में करने के लिए जाने जाते हैं-
रहलीं करत दूध के कुल्ला, छिल के खात रहीं रसगुल्ला सखि हम तऽ खुल्लम-खुल्ला,
झूला झूलत रहीं बुनिया फुहार में, सावन के बहार में ना...
हमारी जिंदगी में केवल सुख ही सुख थे, मन आनंद से सराबोर था, सावन की बारिश में मैं झूला-झूल रही थी...
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हम तऽ रहलीं टह-टह गोर, करत रहलीं हम अँजोर
मोरा अँखिया के कोर,
धार कहाँ अइसन तेज बा कटार में
चाहें तलवार में ना...
मैं गौर वर्ण की मल्लिका थी, दिव्य कांति की वजह से चारो तरफ प्रकाश हो जाता था। मेरी नैन कटारी इतनी तेज थी कि वैसी धार तलवार और कटार में भी नहीं होगी।
हँसली चमकल मोरा दाँत, कइलस बिजुली के मात
रहे अइसन जनात,
दाना कहाँ अइसन काबुली अनार में
सुघर कतार में ना...
जब मैं हँसती थी तो मेरे मोतियों जैसे दाँत अपनी चमक बिखेरते थे, ऐसा लगता था कि वे बिजली को भी मात दे देंगे, इतने क्रमबद्ध-पंक्तिबद्ध तो अनार के दाने भी नहीं होते हैं।
जबसे आइल सवतिया मोर, सुखवा लेलसि हमसे छोर,
झरे अँखिया के लोर,
नइया मोर परल बा 'शैदा' मझधार में
सुखवा जरल भार में ना...
जबसे मेरी सौतन आई है, उसने सारे सुख छीन लिया है। लिहाजा मेरी आँखों से आँसू झरते हैं। 'शैदा' अब मेरी जीवन नैया मँझधार में पड़ी है और मेरे सारे सुख भार में जल गए हैं।