करगिल में भारत ने पाक को परास्त करते हुए जब अपना प्रभुत्व कायम किया तब से आजादी की महक जहन में फिर से समां गई। 26 जुलाई का दिन भी पूरे देशवासियों के लिए आजादी का जश्न मनाने का एक भावुक अवसर है। करगिल के विजय दिवस पर हम इन 5 नगमों के साथ आजादी को याद करेंगे...
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी...गीत 1960 में रिलीज हुई फिल्म 'हम हिंदुस्तानी' का है। इस गीत के बोल देशभक्ति के भाव से भरे हुए हैं। गायक हैं मुकेश, संगीतकार हैं उषा खन्ना और प्रेम धवन ने इसे लिखा है।
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं
क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं
चांद के दर पर जा पहुंचा है आज ज़माना
नए जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं
नया खून है नई उमंगें, अब है नई जवानी
हम को कितने ताजमहल हैं और बनाने
कितने हैं अजंता हम को और सजाने
अभी पलटना है रुख कितने दरियाओं का
कितने पवर्त राहों से हैं आज हटाने
आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएं
अपने हाथों से अपना भगवान बनाएं
राम की इस धरती को गौतम कि भूमी को
सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएं
दाग गुलामी का धोया है जान लुटा के
दीप जलाए हैं ये कितने दीप बुझा के
ली है आज़ादी तो फिर इस आज़ादी को
रखना होगा हर दुश्मन से आज बचा के
हर ज़र्रा है मोती आँख उठाकर देखो
मिट्टी में सोना है हाथ बढ़ाकर देखो
सोने कि ये गंगा है चांदी की जमुना
चाहो तो पत्थर पे धान उगाकर देखो
मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती...
मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती...गीत 1967 में रिलीज हुई फिल्म 'उपकार' का है। इस गीत के बोल देशभक्ति के भाव से भरे हुए हैं। गायक हैं महेंद्र कपूर, संगीतकार हैं कल्याण जी-आनंद जी और इंदीवर ने इस गीत को लिखा है।
मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती ...
बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं
ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं
सुनके रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे,
मेरे देश ...
जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है
क्यूँ ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोई नहीं है सब पे है माँ उपकार तेरा,
मेरे देश ...
ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से
रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से,
मेरे देश ...
जब जीरो दिया मेरे भारत ने, भारत ने मेरे भारत ने...
है प्रीत जहाँ कि रीत सदा,मै गीत वहां के गाता हूँ...गीत 1970 में रिलीज फिल्म 'पूरब और पश्चिम' का है। इस गीत के बोल देशभक्ति जैसे शब्द को गर्व से भर देते हैं। गायक हैं महेंद्र कपूर, संगीतकार हैं कल्याण जी-आनंद जी और इंदीवर ने इस गीत को लिखा है।
जब जीरो दिया मेरे भारत ने, भारत ने मेरे भारत ने
दुनिया को तब गिनती आई
तारों कि भाषा भारत ने, दुनिया को पहले सिखलाई
देता ना दशमलव भारत तो, यूं चाँद पे जाना मुश्किल था
धरती और चाँद कि दूरी का, अंदाज़ लगाना मुश्किल था
सभ्यता जहाँ पहले आई, सभ्यता जहाँ पहले आई
पहले जन्मी है जहाँ पे कला
अपना भारत वो भारत है, जिसके पीछे संसार चला
संसार चला और आगे बढ़ा, यूँ आगे बढ़ा बढ़ता ही गया
भगवान करे ये और बढे, बढ़ता ही रहे और फूले फले
बढ़ता ही रहे और फूले फले
मदनपुरी: चुप क्यों हो गये? और सुनाओ
है प्रीत जहाँ कि रीत सदा, है प्रीत जहाँ कि रीत सदा
है प्रीत जहाँ कि रीत सदा,मै गीत वहां के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ, भारत कि बात सुनाता हूँ
है प्रीत जहाँ कि रीत सदा
काले गौरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है
कुछ और ना आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है
जिसे मान चुकी सारी दुनिया, हो जिसे मान चुकी सारी दुनिया
मै बात
मै बात वही दोहराता हूँ, भारत का रहने वाला हूँ
भारत कि बात सुनाता हूँ, है प्रीत जहाँ कि रीत कहाँ
जीतें हों किसी ने देस तो क्या, हमने तो दिलों को जीता है
जहाँ राम अभी तक है नर में, नारी में अभी तक सीता है
इतने पावन हैं लोग जहाँ, इतने पावन हैं लोग जहाँ
मै नित नित
मै नित नित शीश झुकता हूँ, भारत का रहने वाला हूँ
भारत कि बात सुनाता हूँ
इतनी ममता नदियों को भी, जहाँ माता कहके बुलाते हैं
इतना आदर इंसान तो क्या, पत्थर भी पूजे जाते हैं
उस धरती पे मैंने जनम लिया, हो उस धरती पे मैंने जनम लिया
ये सोच
ये सोच के मै इतराता हूँ. भारत का रहने वाला हूँ,
भारत कि बात सुनाता हूँ, है प्रीत जहाँ कि रीत सदा
ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम...
ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम...गीत 1965 में रिलीज फिल्म 'शहीद' का है। इस गीत के बोल देशभक्ति को नया आयाम देते हैं। गायक हैं मोहम्मद रफी, संगीतकार हैं प्रेम धवन और प्रेम धवन ने ही इस गीत को लिखा है।
तू ना रोना, के तू है भगत सिंह की माँ
मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
डोली चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं
जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसीका जीना है
जो मरना देश पर जाने
जब शहीदों की डोली उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं
ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों मैं जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन
कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यू पी से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन ...
तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशाँ तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे
कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों...
कर चले, हम फ़िदा, जान-ओ-तन साथियों...गीत 1964 में रिलीज फिल्म 'हकीकत' का है। इस गीत के बोल देशभक्ति और आजादी को नया मुकाम देते हैं। गायक हैं मोहम्मद रफी, संगीतकार हैं मदन मोहन और कैफी आजमी ने इस गीत को लिखा है।
कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
साँस थमती गई नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते मरते रहा बाँकापन साथियों, अब तुम्हारे ...
ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं
हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथियों, अब तुम्हारे ...
राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये क़ाफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले
आज धरती बनी है दुल्हन साथियों, अब तुम्हारे ...
खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाये न रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाये न सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियों, अब तुम्हारे ...
8 वर्ष पहले