भाई - बहन का रिश्ता शब्दों से परे होता है, जिसे व्यक्त नहीं किया जा सकता। लेकिन ऐसी कई फिल्में हैं जिनमें कहानी और पात्रों के माध्यम से इस रिश्ते की संवेदनाओं को प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है।
फ़िल्म- राखी (1962)
फ़िल्म निर्देशक- ए. भीमसिंह
इस फ़िल्म में राजू और राधा नाम के भाई- बहन की कहानी है जिसमें भाई का किरदार अशोक कुृमार ने निभाया है और बहन के किरदार में वहीदा रहमान हैं। यह फ़िल्म इन दोनों की कहानी को आगे लेकर चलती है कि किस तरह वह हर तरह की परिस्थितियों में एक दूसरे के साथ रहते हैं और गलतफ़हमी उन्हें दूर ज़रूर कर देती है लेकिन आख़िर में वह एक साथ अपने राखी के बंधन को निभाते हुए मर जाते हैं। इसका गीत 'राखी धागों का त्यौहार' लोकप्रिय है।
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1959 में आयी इस फ़िल्म में बहन का किरदार निभाया है नन्दा कर्नाटकी ने और भाई के किरदार में बलराज साहनी हैं। इस फ़िल्म में भाई-बहन के रिश्ते को बहुत ही ख़ूबसूरत ढंग से पर्दे पर दिखाया गया है कि एक भाई अपने बहन की ख़ुशी के लिए और उसका ख़याल रखने के लिए अपने सपनों की कुर्बानी दे देता हैं। इस फ़िल्म का गीत 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' बहुत प्रसिद्ध है।
1991 की इस फ़िल्म में धर्मेन्द्र और विनोट खन्ना हैं और उनकी बहन स्वप्ना ने उनकी बहन का किरदार निभाया है। इस फ़िल्म को अनिल शर्मा ने निर्देशित किया है। इसका गीत 'भाई-बहन का प्यार' जो बहन की विदाई पर आधारित है बहुत ही मार्मिक है। इसमें बहन स्वप्ना के साथ हुई ज्यादती का बदला भाई धर्मेंद्र लेता है।
इस फिल्म में राखी मां-बाप के मरने के बाद अपने छोटे भाई-बहनों को पाल पोष कर बड़ा करती है और इसमें अपना पूरा जीवन लगा देती हैं। सभी बाद में राखी को ही ताने मारते हैं और कहते हैं कि तुमने आखिर हमाारे लिए क्या किया है। फिल्म में यादगार बहन का रोल करने वाली राखी का सशक्त अभिनय उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाता है।
एक मां के दो बेटों के बिछड़ने को लेकर बनी फिल्म राजा और रंक में अमीरी और गरीबी के बीच के अंतर को दर्शाया गया है। गरीब भाई और बहन प्रेम से अभाव में भी जीवन गुजारते हैं। मां निरुपा राय ने भी काफी भावुक भूमिका अदा की है। बहन नाजीमा हमेशा अपने रंक भाई को दिलासा देती है। अंत में सभी का मिलन होता है।