इंसान के जीवन में रिश्तों की बड़ी अहमीयत होती है। हम जन्म के साथ ही कई रिश्तों में बंध जाते हैं। इन रिश्तों में जो सबसे प्यारा होता है उनमें से भाई-बहन का रिश्ता है। यह धरती पर खुदा की ओर से नवाज़ा गया सबसे पवित्र और अनमोल रिश्ता है। इसके सामने सारे रिश्ते फीके पड़ जाते हैं। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो यह रिश्ता और मज़बूत हो जाता है।
'हम बहनों के लिए मेरे भैया
आता है एक दिन साल में
आज के दिन मैं जहां भी रहूं
चले आना वहां हर हाल में
हम बहनों के लिए मेरे भैया
आता है एक दिन साल में'
आनंद बक्षी साहब ने इस गीत को लिखा है...
ये प्यार का एहसास मुझे 'अंजाना' फिल्म के इस गीत में नज़र आता है। 1969 में रिलीज इस फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत दिया है। आनंद बक्षी साहब ने इस गीत को लिखा है। लता मंगेशकर ने इस गीत को अपनी आवाज दी है। यह गीत जुबली स्टार राजेंद्र कुमार और बबीता कपूर पर फिल्माया गया है। ये गीत भाई-बहन के प्यार की छटाएं बिखेरता है।
रिश्ते तो कई होते हैं दुनिया में लेकिन ये रिश्ता बहुत ही ख़ास होता है। भाई और बहन चाहे कितनी ही दूर क्यों न हों, उनके बीच का प्यार कभी कम नहीं होता।
भाई की अहमियत को बखूबी बयां किया है...
'कितने दिन और कितनी रैनें
इस आंगन में रहना है मैंने
परदेसी होती हैं बहनें
बाबुल जाने भेज दे मेरी
डोली कब ससुराल में
चले आना वहां हर हाल में'
इन पंक्तियों में आनंद बक्षी ने एक बहन के लिए भाई की अहमियत को बखूबी बयां किया है। भाई और बहन एक ही मां के दो फूल हैं लेकिन बहन बड़ी होते ही अपने भाई से दूर अपने ससुराल चली जाती है। जब बहन छोटी होती है और भाई अपने काम के सिलसिले में कहीं दूर चला जाता है तब भी रिश्तों में कुछ फ़ासला आ जाता है। ऐसे में एक बहन अपने भाई से विनती करती हुई उसे राखी बांध रही है। साथ ही अपने दिल के दर्द को भी बयां करते हुए कहती है कि मैं जहां भी रहूं रक्षाबंधन के दिन तुम हर हाल में मेरे पास आ जाना। क्योंकि साल में यही एक दिन ऐसा है जिस पर सिर्फ और सिर्फ मेरा हक है। इन पंक्तियों में भाई से बहन को बिछुड़ने का दर्द साफ झलकता है।
इन पंक्तियों में बहन भाई से बिछुड़ने का दर्द बयां कर रही है...
'हम बहनों के लिए मेरे भैया
आता है एक दिन साल में
आज के दिन मैं जहां भी रहूं
चले आना वहां हर हाल में'
इन पंक्तियों में बहन भाई से बिछुड़ने का दर्द बयां कर रही है। बहन अब बड़ी हो गयी है और उसे अब लगने लगा है कि उसके इस आंगन से विदा होने का समय कभी भी आ सकता है। वो अपने भाई से कहती है कि पता नहीं कब मुझे ससुराल भेज दिया जाए और मैं परदेसी हो जाऊं। ऐसे में बहन भाई को राखी बांधते हुए उससे वचन लेती है कि मैं रक्षाबंधन के दिन जहां भी रहूं, जैसे भी रहूं, जिस हाल में रहूं। तुम उस दिन मेरे पर पास ज़रूर चले आना। साथ ही इस गाने में फ़िल्म निर्देशक मोहन कुमार ने भाई-बहन के बीच नोक-झोंक, रूठने-मनाने के पल को भी बख़ूबी दर्शाया है।
यूट्यूब पर मौजूद आप इस ख़ूबसूरत गीत को यहां सुन सकते हैं...
7 वर्ष पहले