रक्षाबंधन अपने आप में एक अनूठा त्यौहार है। राखी अगर भावनाओं का उत्सव है तो संकल्प का दिन भी है। भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा बंधन के भावनाओं को सिनेमा अपने ढंग से प्रस्तुत करता है। पेश है हिंदी फिल्मों में 'राखी' के गीतों के शेर और मुखड़े-
तेरी साँसों की कसम खाके, हवा चलती है
तेरे चहरे की झलक पा के, बहार आती है
-साहिर लुधियानवी
फिल्म-काजल (1965)
बंधा हुआ एक-एक धागे में भाई-बहन का प्यार
राखी धागों का त्यौहार, राखी धागों का त्यौहार
- राजेंद्र कृष्ण
फिल्म-राखी (1962)
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कितना कोमल कितना सुन्दर, भाई-बहन का नाता
इस नाते को याद दिलाने, ये त्यौहार है आता
- राजेंद्र कृष्ण
फिल्म-राखी (1962)
हम बहनों के लिए मेरे भैया, आता है एक दिन साल में
आज के दिन मैं जहाँ भी रहूँ, चले आना वहाँ हर हाल में
- आनंद बक्षी
फिल्म-अंजाना (1969)
दुनिया की जितनी बहनें हैं, उन सबकी श्रद्धा है इसमें
है धरम करम भैया का ये, बहना की रक्षा है इसमें
- वर्मा मलिक
फिल्म-बेईमान (1972)
इसे समझो ना रेशम का तार भइया
मेरी राखी का मतलब है प्यार भइया
- संतोष आनंद
फिल्म- तिरंगा (1993)
मेरे भैया मेरे चँदा, मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की, कोई चीज़ न लूँ
-साहिर लुधियानवी
फिल्म-काजल (1965)
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है
प्यार के दो तार से, सँसार बाँधा है
- शैलेन्द्र
फिल्म-रेशम की डोरी (1974)
मेरा फूल है तू, तलवार है तू
मेरी लाज का पहरेदार है तू
- शैलेन्द्र
फिल्म-रेशम की डोरी (1974)
ये दिन ये त्योहार खुशी का, पावन जैसे नीर नदी का
भाई के उजले माथे पे, बहन लगाए मंगल टीका
- शैलेन्द्र
फिल्म- छोटी बहन (1959)
चंदा रे, मेरे भैया से कहना,
ओ मेरे भैय्या से कहना, बहना याद करे
- साहिर लुधियानवी
फिल्म-चंबल की कसम (1980)