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'इंसानियत' पर ये हैं 10 चुनिंदा शेर...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  उम्मीद वो जज़्बा है जिसके दम पर इंसानियत जिंदा है। शायरी और कविताएं इंसानियत और भाईचारे में ऊर्जा भरने का काम करती हैं। पेश है इंसानियत और भाईचारे पर शायरों के अल्फ़ाज़- 

प्यार की चाँदनी में खिलते हैं
दश्त-ए-इंसानियत के फूल हैं हम
- मसूद मैकश मुरादाबादी
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....हर हाल में हमदर्द हो 

आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो 
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़ 
- हफ़ीज़ जौनपुरी

मज़हबी बहस मैंने की ही नहीं 
फ़ालतू अक़्ल मुझमें थी ही नहीं 
- अकबर इलाहाबादी

क्या-क्या ग़ुबार उठाए नज़र के फ़साद ने
इंसानियत की लौ कभी मद्धम न हो सकी
- अज्ञात

...प्यार का जज्बा

रखते हैं जो औरों के लिए प्यार का जज्बा
वो लोग कभी टूट कर बिखरा नहीं करते
- अज्ञात 

बनाया ऐ 'ज़फ़र' ख़ालिक़ ने कब इंसान से बेहतर 
मलक को देव को जिन को परी को हूर ओ ग़िल्माँ को 
- बहादुर शाह ज़फ़र

घरों पे नाम थे...

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
- बशीर बद्र

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है
सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है
- निदा फ़ाज़ली

नई मंज़िल नया जादू

नई मंज़िल नया जादू उजाला ही उजाला
दूर तक इंसानियत का बोल-बाला
- मोहम्मद अली असर

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है 
हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है 
- अनवर शऊर
7 वर्ष पहले
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