विज्ञापन

मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब: जॉन एलिया के बेहतरीन 20 शेर...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  
जॉन एलिया उर्दू शायरी की महफ़िल का एक बहुत बड़ा नाम हैं। उनके लिखे शेरों को पढ़कर यह लगता है कि उन्होंने खुद को इश्क़ में इस कदर आबाद कर लिया था कि आज तक की पीढ़ियों में भी जॉन की मक़बूलियत बरकरार है। 
पेश हैं उनके लिखे कुछ मशहूर शेर

कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया 

तू मुझे ढूँढ़ मैं तुझे ढूंढ़ूं
कोई हम में से रह गया है कहीं 
 
विज्ञापन

जॉन एलिया

अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या 

सब दलीलें तो मुझ को याद रहीं
बहस क्या थी उसी को भूल गया 

जॉन एलिया

उन से वादा तो कर लिया लेकिन
अपनी कम-फ़ुर्सती को भूल गया 

हम जी रहे हैं कोई बहाना किए बग़ैर
उस के बग़ैर उस की तमन्ना किए बग़ैर 

जॉन एलिया

ऐ क़ातिलों के शहर बस इतनी ही अर्ज़ है
मैं हूँ न क़त्ल कोई तमाशा किए बग़ैर 

इक अजब हाल है कि अब उस को
याद करना भी बेवफ़ाई है 

जॉन एलिया

ख़ुद को भूला हूँ उस को भूला हूँ
उम्र भर की यही कमाई है 

 उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं 

जॉन एलिया

ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया
मैं तो उस ज़ख़्म ही को भूल गया 

 एक ही तो हवस रही है हमें
अपनी हालत तबाह की जाए 

जॉन एलिया

काम की बात मैं ने की ही नहीं
ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मेरी जान तेरे बस का नहीं 

जॉन एलिया

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने 

 जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है 

जॉन एलिया

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे 

 मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं 

जॉन एलिया

ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या 

 ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर
था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियाँ था 
 

8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all