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जाति-पाँति का भेद भुलाकर तुमको आगे बढ़ना है: वीरेन्द्र वत्स

काव्य डेस्क

Kavita
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                            अगड़े-पिछड़े-दलित भाइयो! भारत माँ की सुनो पुकार
        
                                                    
                            
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

बाहर-भीतर लाखों दुश्मन घात लगाकर बैठे हैं
तुम आपस में लड़ो-भिड़ो,यह आस लगाकर बैठे हैं
रहो एकजुट, उन्हें नहीं उठने देना है अबकी बार 
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

देश बचेगा तभी तुम्हें सारे अधिकार मिलेंगे 
जन-जन का होगा विकास समता के फूल खिलेंगे
आपस में ही रार ठनी तो मिट जाएगा घर-परिवार 
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

बँटे हुए थे इसीलिए तो आठ सदी तक रहे गुलाम
जब से आँखें खुलीं तुम्हारी, मचा शत्रुओं में कोहराम
निष्फल कर दो उनकी साजिश और पलटकर करो प्रहार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

देश बचाने की खातिर बस तुम्हें एकमत होना है
संबंधों की हरित भूमि पर बीज प्रेम का बोना है
गले लगाओ, सुख-दुख बाँटो, अपनी भूल करो स्वीकार 
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

जाति-पाँति का भेद भुलाकर तुमको आगे बढ़ना है
रोटी-पानी के रिश्ते से नया सवेरा गढ़ना है
तुच्छ स्वार्थ के लिए न पड़ने देना अपने बीच दरार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

जो भारत के शुभचिन्तक हैं उन लोगों को जोड़ो तुम
जो तलवारें जुटा रहे हैं उनकी बाँह मरोड़ो तुम
यही समय है उनकी मंशा का करना होगा प्रतिकार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

यहाँ प्रकृति के सभी रूप अपना अनुराग लुटाते हैं
राम-कृष्ण-गौतम-नानक जीवन की राह दिखाते हैं
इसी राह पर चलकर सारे बड़े स्वप्न होंगे साकार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

सहज सनातन राह तुम्हारी जिसमें है सबका सम्मान
सभी अंश हैं परमपिता के, हर प्राणी उनकी संतान
पृथ्वी को परिवार मानकर तुमने झेले अत्याचार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

सहनशीलता और अहिंसा सज्जनता के भूषण हैं
लेकिन अस्त्र उठाना होगा यदि समक्ष खर-दूषण हैं
हर युग में होता आया है दम्भी दुष्टों का संहार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

तुममें शक्ति अपार जरा तुम अपने भीतर झाँको तो
अपनी पावन परिपाटी को नए सिरे से आँको तो
कर्तव्यों पर काम करो अधिकार स्वयं आएंगे 
सुख के बादल झूम-झूम कर अमृत बरसाएँगे
तुमको आशा भरी दृष्टि से देख रहा सारा संसार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

करते हैं घुसपैठ और छाती पर चढ़कर बैठे हैं
वही तुम्हारा हिस्सा खाकर तुमसे ऐंठे-ऐंठे हैं
आज देश की हर सेवा पर जनसंख्या का बढ़ा दबाव
इसीलिए मारामारी है, इसीलिए ऊँचे हैं भाव
उन्हें यहां से वापस भेजो, यही समस्या का उपचार
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

देखो बंगलादेश जहाँ अपनों पर संकट आया है
बर्बर हैवानों ने खुलकर खूनी खेल रचाया है
वहाँ पीड़ितों में ज्यादातर दलितों की आबादी है 
कटती-मरती वही कौम जो बँटवारे की आदी है
वहाँ नहीं मिलता आरक्षण, रोटी का भी नहीं जुगाड़ 
गली-गली में मार-काट है लेकर बस मज़हब की आड़
यही हाल सन् नब्बे में कश्मीरी जनता ने देखा 
कट्टरता ने जहाँ मिटा दी लाखों की जीवन रेखा
लूट और हिंसा के आगे सारे उद्यम हैं बेकार 
पहले मिलकर देश बचाओ फिर ले लो सारे अधिकार 

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