टहनी पर फूल जब खिला
हमसे देखा नहीं गया।
एक फूल निवेदित हुआ
गुलदस्ते के हिसाब में
पुस्तक में एक रख दिया
एक पत्र के जवाब में
शोख़ रंग उठे झिलमिला
हमसे देखा नहीं गया।
प्रतिमा को औ’ समाधि को
क्षण-भर विश्वास के लिए
एक फूल जूड़े को भी
गुनगुनी उसाँस के लिए
अलि गुंजन, गीत सिलसिला
हमसे देखा नहीं गया।
एक फूल विसर्जित किया
मिथ्या सौंदर्य-बोध को
अचकन की शान के लिए
युग के कापुरुष क्रोध को
व्यंग्य टीस उठी तिलमिला
हमसे देखा नहीं गया।