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Sawan 2024: दिनेश कुमार शुक्ल की कविता- सावन में

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  ऐसा क्या कुछ हुआ कि तुमने आनन फानन में 
इंद्रधनुष भर डाले सारे नभ के आँगन में 

जीवन जल की झील लबालब नभ के आँगन में 
झूम रहा है नंदन कानन नभ के आँगन में 

उमड़ घुमड़ फिर आए बादल नभ के आँगन में 
श्याम बने घन-श्याम बिचरते नभ के आँगन में 

राधा की पाज़ेब चमकती नभ के आँगन में 
गूँज उठी बादल की मादल नभ के आँगन में 

मन का हंस हुलसता उड़ता नभ के आँगन में 
ले फुहार की झीनी चादर नभ के आँगन में 
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फिर बूँदों का नाच छमाछम जग के आँगन में 
खेतों में बाग़ों में बन आँगन आँगन में 

फूटे अंकुर बिकसा जीवन जग के आँगन में 
छूटे बीर बहूटी के दल कानन कानन में 

टूटे सारे बंधन टूटे जग के आँगन में 
जड़ जंगम सब नाच रहे जग के आँगन में 

PC: istock

धानी चूनर के हलकोरे सबके आँगन में 
फिर झूलों की पैंग बढ़ी तो नभ के आँगन में 

ऐसा क्या कुछ हुआ कि तुमने आनन फानन में 
सावन ही सावन रच डाला अबकी सावन में 

2 वर्ष पहले
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